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सोलह कलाओं से युक्त भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापरयुग में हुया था। कहा जाता है कि जब पृथ्वी पर पाप ज्यादा बढ़ गया था तक भगवान विष्णु ने आठवां अवतार के रूप में, सोलह कलाओं से युक्त श्रीकृष्ण अवतार लिये। महाभारत युद्ध के समय श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो गीता का ज्ञान दिए वो दुनियां के लिए सबसे बड़ा खजाना था।
महाभारत केवल कौरवों का अंत नहीं था, बल्कि यह भगवान कृष्ण, यादव वंश और पांडवों के विनाश की शुरुआत थी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद रानी गंधारी के श्राप के अनुसार यदुवंश का विनाश हो गया था।
द्वारका शहर जलमग्न
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यदुवंश का नाश हो जाने के बाद श्रीकृष्ण भी ज्यादा दिनों तक पृथ्वी पर नही रहें। उनके जाने के बाद द्वारका शहर समुद्र में जलमग्न हो गया। यह शहर भारत मे गुजरात की पश्चिमी तट खाबा की खाड़ी पर स्थित था।
बहुत समय तक भगवान कृष्ण के प्राचीन शहर को केवल एक मिथक माना गया था, लेकिन 2000 ई० में समुद्र की गहराइयों में खोजा जाने वाले खंडहर पुराने भारतीय कथा में जीवंत होकर साँस लेने लगा है। आज का यह द्वारका खाबा की खाड़ी में, महासागर सतह के नीचे 131 फीट की गहराई मे खंडहर बनकर स्थित है। कई कलाकृतियों को साइट से बरामद किया गया है, संभवतः यह 5-6 हजार ईसा पूर्व को दिनांकित किये हुये हैं।
भगवान कृष्ण 125 वर्षों तक जीवित रहे
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18 फरवरी, 3102 ईसा पूर्व श्रीकृष्ण ने प्रभास पाटन में 125 साल सात महीने और छह दिन रहने के बाद हिरन नदी के तट पर अपना अंतिम सांस लीये। यह खोज प्राचीन ग्रंथों में कई संकेतों पर आधारित है। विष्णु पुराण' और 'भगवद् गीता' के अनुसार श्रीकृष्ण ने महाभारत लड़ाई के 36 साल बाद द्वारका छोड़ा था और उसके बाद किसी ने नहीं देखा उन्हें। मत्स्य पुराण का उल्लेख है कि जब वह लड़ाई लड़ा गया था तो वे 89 वर्ष के थे। वहीं महाभारत में कहा गया है कि कलयुग का आगमन श्रीकृष्ण को जाने के बाद से शुरू हुआ और इस साल कलयुग का 5,119 वें वर्ष है। इन सभी संकेतकों ने हमे तिथि तक पहुंचने में मदद की। इस आधार पर श्रीकृष्ण का जन्म अब से 5,244 वर्ष पहले हुया था।

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